भूतिया मकान
प्रतापगढ़ शहर के निकट एक छोटे से गांव में एक पुराने और भूतिया मकान की कहानी है। इस मकान के बारे में सुनकर लोग डर के मारे इसके पास से भी नहीं गुजरते थे। उस मकान के पास का इलाका सभी को बिलकुल डरावना लगता था।
वह मकान वीरान होने के साथ-साथ ख़ौफनाक भी था। सुनसान रास्ता उस जगह तक जाने को हैरान कर देता था। वहाँ के लोग रात में उस मकान के पास से निकलने से बचने के लिए ख़ास रास्ते से चलते थे, ताकि उन्हें कोई प्रेत या भूत पकड़ न ले।
एक दिन, वहाँ के गांव का एक नवजवान लड़का नाम राहुल उस मकान के बारे में काफ़ी सुनवाई सुनकर भी उस जगह की ताक़त को नहीं मानता था। उसे ऐसा लगता था कि लोग बस डरावनी कहानियों को फैलाकर उस जगह का नाम ख़राब कर रहे हैं। इसलिए एक दिन उसने मन बनाया कि वह भूतिया मकान का सच जाने के लिए वहाँ जाएगा।
रात के समय जब सब सो रहे थे, राहुल ने अपने दोस्तों को बिलकुल नहीं बताया, और आकेले ही उस भूतिया मकान की तरफ चल पड़ा। मकान के पास पहुँचकर उसे बड़े ही डर की अनुभूति हो रही थी। अंदर से आवाज़ आने लगी थी, और उसका हृदय धड़कने लगा। लेकिन वह अडिग रहकर अंदर जा पहुँचा।
राहुल बड़े विचलित होकर वहाँ से बाहर निकल आया। उसे आँखों से दिखने लगे उन रातों की घड़ियाँ, जब भूतिया मकान में आवाज़ें आती थीं। वह समझ गया कि उसे उस मकान के भूतपूर्व मालिक को उसे अंतिम विदा कहने की आवश्यकता है।
अगले दिन, उसने भूतिया मकान के आगे एक छोटे से पूजा स्थल बनवा दिया। वहाँ पर जलती दीपक के सामने उसने भूतपूर्व मालिक को अपने प्रेम भरे दिल से श्रद्धांजलि अर्पित की। वह आज तक भूतिया मकान के पास नहीं जाता, लेकिन उसके द्वारा स्थापित किया गया पूजा स्थल वहाँ के लोगों के लिए आशा की किरण बन गया। वह भूतिया मकान अब एक भयानक स्थान की बजाय एक धार्मिक स्थल बन गया था।
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