वापस जा ओ स्वप्ना
फ़िर रात हो गई। गरमाई घर के सभी लोग सो गए, लेकिन स्वप्ना नामक बेटी अभी तक नहीं सो पाई थी। उसे कुछ अजीब सी बात हो रही थी। कुछ देर सोचने के बाद, उसने दिवार के पीछे छिपे जाने का फैसला किया।
धीरे-धीरे उसने दिवार के पीछे छलकते हुए रास्ते पर पैर रखा। वहां उसे अजीब सी दुनिया का अनुभव हुआ। रात की अंधकार उसको घेर रही थी, और एक अजीब सी ठंडी हवा चल रही थी। उसके सामने जंगली और काले वृक्ष थे।
स्वप्ना ने एक कदाचित रूप से हीटलर के गूँजते हुए शव की तस्वीर देखी। धीरे-धीरे उसे विचार आने लगे कि शायद यहाँ पर कोई आत्मा बसती है।
धीरे-धीरे उसने एक पुराने हॉल में अपने पैर रखे। हॉल में अंधकार छाया हुआ था, लेकिन उसने धीरे से अगले कमरे की ओर बढ़ना शुरू किया।
कमरे के अंदर का माहौल भी अजीब था। वहां पर एक पुरानी दीवार पर ताम्रपत्र थे, जिनमें कुछ लिपियों के निशान दिखे। स्वप्ना ने उन लिपियों को पढ़ने की कोशिश की, लेकिन वे धीरे-धीरे गायब हो गए।
तभी एक अजीब सी ध्वनि सुनाई दी। स्वप्ना के दिल की धड़कन तेज हो गई। उसने देखा, वहां पर एक हुनरेड रूपिये का सिक्का बिखरा हुआ था। उसको उठाने की चेष्टा करते हुए, उसने वहां अपने पांव रखे। लेकिन चौंकाने वाली बात थी कि सिक्के ने उसके हाथ नहीं लिये, बल्कि अचानक खुद ही ऊपर उठ जाने लगे।
वहां से उसने एक अजीब सी आवाज सुनी, "वापस जा ओ स्वप्ना, यहाँ तुम्हारे लिए कुछ नहीं है।"
भयानक स्वर में बगुले ने कहा, "तुम यहाँ से नहीं जा सकती। तुम्हारी आत्मा अब मेरे काबिज में है। तुम्हें मुक्ति पाने के लिए तुम्हें एक कठिन चुनौती पर गुजरनी पड़ेगी। अगर तुम उसे पार कर लेती हो, तो शायद तुम्हें मुक्ति मिले।"
स्वप्ना अब बिल्कुल व्यथित हो गई। उसे यह सब बिल्कुल समझ नहीं आ रहा था। उसे अब सफलता के लिए उस कठिन चुनौती को पार करने की जरूरत थी।
उस रात को स्वप्ना ने उस खौफनाक हॉल में गुजार दिया। दिन निकल आया और उसे उसी जंगल से गुजरने की जरूरत थी जहां उसने पहली बार आत्मा की भेंट की थी।
दोपहर के समय, स्वप्ना ने वह खौफनाक जंगल के रास्ते की ओर मुड़ लिया। रास्ते में वहां विचरण करते हुए उसे एक अलग ही पेड़ मिला। उस पेड़ की नीचे एक साड़ी पहने हुए महिला बैठी थी, जिसका चेहरा उसके पिछे दिख रहा था।
स्वप्ना ने दिल से दुआएं मांगी और प्राणायाम के साथ उस महिला के पास जाने का साहस किया। जैसे ही उसने उसके सामने पहुंचा, महिला उसे एक आत्मीय हावभाव देने लगीं। उसने स्वप्ना को एक खास ताकत से बचाने की कला सिखाई।
महिला ने कहा, "बेटी, तुम जो चुनौती पर खड़ी हो, वह तुम्हें सिर्फ और सिर्फ इसलिए मिली है कि तुम विश्वास रखो और साहसी रहो। इस आत्मीय भूत प्रेत की शक्तियों को तुम्हें हराने के लिए तुम्हें साहसी होना होगा। तुम्हारे मन में शंका नहीं होनी चाहिए, और तुम्हें अपनी ताकत पर विश्वास होना चाहिए।"
स्वप्ना ने धीरे-धीरे महिला के बताए गए उपायों को अपनाया और उस भयानक आत्मीय भूत प्रेत के खिलाफ उसने जीत हासिल की।
उस दिन के बाद से, स्वप्ना ने उस घर के सभी लोगों को उस खौफनाक आत्मा के बारे में बताया और उन्हें बताया कि कैसे उसने उसकी चुनौती का सामना किया और उसे विजयी बनाया।
उस घर में अब उस आत्मा की आत्मीयता से राहत हुई थी। वे सभी साथी एक-दूसरे के साथ शांति और सुख भरे जीवन जी रहे थे। स्वप्ना ने अपने साहस और विश्वास के साथ उस खौफनाक आत्मा को शांत कर दिया था, और उसने इसे सबके साथ साझा करके उन्हें भी आत्मीयता से जीने का संदेश दिया था।
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